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बॉयकॉट चाइना – आत्मनिर्भरता की ओर एक कदम

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अवलोकन

  • BoycottChina और #BoycottChineseProducts किवर्ड्स के साथ ट्विटर प्लेटफॉर्म पर एक अहिंसक मुहिम छिड़ी हुई है ।
  • Remove China Apps , जिसका प्रमुख कार्य मोबाइल फोन से चाइनीज़ ऐप्स की पहचान करके उन्हें डिलीट करना है, कुछ ही दिनों में 4.8 रेटिंग हासिल की और केवल दो हफ्तों में 10 लाख से अधिक बार डाउनलोड किया गया।
  • लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) विवाद, कोविड-19 और व्यापारिक युद्ध कुछ प्रमुख कारण हैं जिन्होंने चीन के विरूद्ध आवाज़ को तेज किया है।
  • Remove China Apps को 2 जून 2020 तक Google Play Store से हटा दिया गया।

विषय – सूची

  1. क्या है बॉयकॉट चाइना?
  2. कारण जिन्होंने अभियान को बढ़ावा दिया
  3. इतिहास
  4. भारत-चीन विवाद की वर्तमान स्थिति
    1. रिमूव चाइना एप्स
  5. डेटा साइंस रिपोर्ट
    1. कीवर्ड विश्लेषण
    2. भावनात्मक विश्लेषण
  6. अन्त में

1. क्या है बॉयकॉट चाइना?

बॉयकॉट चाइना चीनी उत्पादों की खरीद और उपयोग को छोड़ने के उद्देश्य के साथ ट्विटर पर छिड़ी हुई जंग का एक ट्रेंडिंग नारा है। यह नारा 31 मार्च 2020 से #MadeChinaPay या #BoycottTikTok के साथ सामने आया। आखिरकार, अब यह #BoycottChina या #BoycottChineseProduct या #BoycottMadeInChina में तब्दील हो चुका है।

फिलीपींस, वियतनाम, अमेरिका और भारत जैसे कई देश चीन विरोधी भावना का अनुसरण कर रहे हैं। अगले भाग में हम इस अभियान के कारणों को जानेंगे। 

2. कारण जिन्होंने अभियान को बढ़ावा दिया

चाइना द्वारा कोविड-19 महामारी का फैलना दुनिया भर के लिए एक संकट बना हुआ है। इस संदर्भ में वास्तविक तथ्यों को छुपाने  के आरोप भी चीन पर लगते रहे हैं। उसके अतिरिक्त अपने पड़ोसी राष्ट्रों के लिए संकट उत्पन्न करने के कारण चीन के लिए शीत युद्ध की स्थिति पैदा हो रही है। नवंबर 2019 में चीन के एक शहर वुहान से घातक रूप से फैलने वाले कोरोनोवायरस में वृद्धि हुई और केवल 7 महीनों में 389,000 से अधिक लोगों की मृत्यु के साथ 6,850,000+ लोग संक्रमित हो गए। अब, भारत 236,000 से अधिक रोगियों और 6,650 से अधिक मृत्यु के साथ पांचवां सबसे संक्रमित देश बन चूका है।

अप्रैल 2020 में जब भारत पूरी तरह से बंद था और कुछ देश जैसे इटली, संयुक्त राज्य अमेरिका, जर्मनी, स्पेन मेडिकल उपकरणों की आपूर्ति (मास्क, दस्ताने, कवर, गॉगल आदि) पाने के लिए चीन के दरवाजे पर प्रतीक्षा सूची में थे, तो संकट के समय चीन ने उपकरणों की लागत काफी बढ़ा दी। इसके अलावा चीन विदेशी बाजारों से शेयर भी खरीद रहा है, जबकि इस दौरान अन्य देश कोरोनावायरस जैसी महामारी से लड़ने में व्यस्त हैं।

चीन हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को बनाने के लिए आवश्यक कच्चा निर्यात करता है। इस कठिन समय में, चीन ने कच्चे माल की लागत भी बढ़ा दी है। भारत दुनियाँ में इस दवा की सबसे बड़ी मात्रा की आपूर्ति कर रहा है, और यह इन कच्चे माल का एक प्रमुख आयातक है।

यही नहीं, जब देश कोविड-19 और चीन के मुख्य आपूर्तिकर्ता होने के खिलाफ संघर्ष कर रहे थे, तब चीन ने भारत और अन्य देशों को बेकार पड़ी 50,000 खराब गुणवत्ता वाली पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPE) किट की आपूर्ति की।

उपरोक्त कारणों से पता चलता है कि चीन ने महामारी के दौरान अन्य देशों की मदद करने के बजाय अपनी अर्थव्यवस्था को उन्नत करने का लक्ष्य रखा है। नतीजा ये हुआ कि चीन का उद्देश्य उनके खिलाफ एक चुनौती के रूप में सामने आया और दुनिया भर के अधिकाँश लोगों को चीन का बहिष्कार करने के लिए उकसा दिया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सहयोगी स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) ने समाज कल्याण के लिए प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर भारत के मंत्र को बढ़ावा दिया, जिसमें अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी, जापान और 15 देशों के लोग शामिल हुए हैं। इनमें नेपाल भी शामिल है।

हजार से अधिक संगठन अपनी कंपनियों को भारत में स्थानांतरित करना चाहते हैं और लगभग 300 ने अनुबंध पर हस्ताक्षर भी किए हैं।

3. इतिहास

चीन विरोधी भावना का पालन करने वाले कई देशों का मानना ​​है कि – कोरोनावायरस चीनी प्रयोगशाला में किए गए जैविक प्रयोगों का परिणाम है। हालांकि, इस दावे का समर्थन करने के लिए कोई सबूत नहीं मिला है, फिर भी महामारी के दौरान चीन की गतिविधियों पर ये सवाल उठते रहे है। 

जहाँ तक ​​भारत के साथ संबंध का सवाल है, तो विश्व के इन दो सबसे अधिक आबादी वाले देशों के बीच 1960 के दशक में एक लड़ाई लड़ी गई थी। इसके अलावा चीन के साथ भारत और कई अन्य देशों जापान, ताइवान, रूस के साथ सीमा विवाद भी है।और बीच बीच में सीमा विवाद के मामले उभरते भी रहते हैं। भारत और चीन के बीच लगातार सीमा विवाद छिड़ने के तनाव को नीचे दी गई तालिका में दर्शाया गया है।

S.Noवर्षतथ्य
1(20 अक्टूबर -20 नवंबर) 1962कई अन्य मुद्दों के साथ हिमालयी सीमा विवाद
2(11 सितंबर -15 सितंबर) 1967नाथू ला में झड़पें
31 अक्टूबर 1967   चो ला पर झड़प
41987चीन-भारतीय झड़प
5जून 2017 चीन भारत सीमा गतिरोध या डोकलाम गतिरोध 

वर्तमान परिस्थितियों से पता चलता है कि व्यापार के मोर्चे पर, चीन ऐसे मौके पर अवसरवादी हो रहा है, जबकि विश्व की अर्थव्यवस्थाएँ  धराशाई हो रही हैं। सीमा विवादों में भी यही स्थिति दिखाई दे रही है। 

वर्तमान स्थिति में चीन हांगकांग को अपने देश में मिलाने की योजना भी बना रहा है। हांगकांग के कई कार्यकर्ता चीन से स्वतंत्रता चाहते हैं। यही कारण है कि इस क्षेत्र में भी तनाव बढ़ गया है। बता दें कि – वियतनाम और तिब्बत जैसे कुछ अन्य क्षेत्र भी हैं जिनपर चीन द्वारा कब्जा कर लिया गया है और वो इससे मुक्ति चाहते हैं।

4. भारत-चीन विवाद की वर्तमान स्थिति

भारत-चीन विवाद लगातार 5 म‌ई के बाद से सक्रिय है। 5 मई 2020 से दुनियाँ की सबसे अधिक जनसँख्या वाले दो देशों की सेना हजारों की सँख्या में LACDS-DBO के दोनों किनारों पर आमने-सामने खड़ी हैं। यह 2000 और 2019 के बीच भारत के बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (BRO) द्वारा निर्मित भारत के पूर्वी लद्दाख में एक सड़क है। डारबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी (DS-DBO) के कारण चीन कि चिंता बढ़ी हुई है। भारत का मानना है कि भारत का यह प्रयास सीमावर्ती क्षेत्र के बुनियादी ढांचे के सुधार हेतु है। परिणामस्वरूप, चीनी सेना लद्दाख सेक्टर में, गालवान घाटी नदी पर, भारतीय क्षेत्र में 3-4 किलोमीटर तक घुस चुकी है। यह सड़क लेह शहर की राजधानी को दक्षिणी श्योक घाटी में श्योक से जोड़ती है और दरबुक गाँव से होकर गुजरती है। जानकारी के अनुसार, चीनी सेना ने भारतीय क्षेत्र (गैलवान नदी घाटी) में बड़ी संख्या में पहुँचकर और पर्याप्त रक्षा सुविधाओं को ले कर बड़ी गश्त की। इससे तनाव और भी बढ़ गया है।

यह सीमा विवाद जो दिन-ब-दिन गति को प्राप्त कर रहा है, इसे शाँत करने के लिए, भारत और चीन की सेनाओं के शीर्ष जनरलों के बीच 6 जून को एक बैठक आयोजित की गई थी, इसका अभी कोई परिणाम नहीं आया है।

4.1. ‘रिमूव चाइना एप्स’

इस समय  जब दुनिया चीन की चालों से चिंतित है, Google Play Store पर Remove China Apps एक शीर्ष ऐप के रूप में उभरा है। यह 4.8 रेटिंग अर्जित करने में सक्षम रहा और कुछ ही दिनों में 1 मिलियन डाउनलोड को पार कर चुका है। इसे Google Play Store से हटा दिया गया है। Google ने कहा है कि यह Google play Developer नीति का विरोध करता है। हालाँकि, कई लोगों को यह बात अभी भी हजम नहीं हुई है। 

5. डेटा साइंस रिपोर्ट

इस खंड में चीन विरोधी भावना को डेटा की मदद से दिखाया गया है। टीम – द डाटा ट्रिब्यून ने इसे पूरा करने के लिए 2000 सबसे हालिया ट्वीट से डेटा का विश्लेषण किया है।

5.1. कीवर्ड विश्लेषण 

ट्रेंडिंग कीवर्ड का वर्डक्लाउड

यहां ट्रेंड को समझने के लिए ट्वीट्स का विश्लेषण किया गया है। साथ ही चर्चा में ज़्यादा प्रयोग किये जा रहे शब्दों को वर्ड-क्लाउड के रूप में दर्शाया गया है। वर्ड-क्लाउड के माध्यम से सबसे अधिक चर्चित शब्द/कीवर्ड को सबसे बड़े आकार में दर्शाया जाता है और ऐसे ही सभी शब्दों का आकर उनकी आवृत्ति पर निर्भर करता है। यहाँ देखा जा सकता है कि – बॉयकॉट चीन के साथ-साथ हांगकांग का मुद्दा और भारत के साथ विवाद प्रमुख प्रभावों (CCP, भारतीय आदि कीवर्ड) के रूप में है। यह देखा जा सकता है कि- लोग ‘शर्ट’ कीवर्ड को लेकर भी कुछ ट्वीट्स क्र रहे हैं। जब हमारी टीम ने जब इस दिशा में जांच की तो पाया कि यह चीनी परिधान कंपनियों की चतुर व्यापारिक रणनीति के कारण ट्रेंड कर रहा है। यह जानना हास्यास्पद है कि चीन खुद ‘बॉयकॉट चाइना’ के नारे के साथ शर्ट और टोपियों का उत्पादन कर रहा है।

5.2. भावनात्मक विश्लेषण

यहाँ सकारात्मक, तटस्थ और नकारात्मक नामक तीन भावनाओं में ट्वीट्स को बाँटा गया है। यह सभी ट्वीट 1 मई से 6 जून 2020 के बीच पोस्ट किये गए हैं।  

उपरोक्त बार ग्राफ बताता है कि पिछले एक महीने में 56.8% ट्वीट सकारात्मक और 27.7% नकारात्मक भावना के साथ पोस्ट किये गए हैं। साथ ही साथ लगभग 15.5% ट्वीट्स इनमें से किसी भी भावना को नहीं प्रकट नहीं करते हैं।

6. अंत में

इस अध्ययन के बाद पता चलता है कि आज के इस कठिन दौर में चीन-विरोधी भावना उनके स्वार्थी व्यवहार के परिणामस्वरूप ख़ुद चीन के लिए एक चुनौती बनकर खड़ी हुई है। यह भावना दिन-प्रतिदिन और अधिक शक्तिशाली होती जा रही है। चीन का मुकाबला करने के लिए आठ देशों ने 6 जून को एक गठबंधन बनाया है। इससे बॉयकॉट चाइना अभियान की ताकत का पता चलता है।

यह समय विश्व की आर्थिक शक्तियों के बदलाव के संकेत दे रहा है। चीन के प्रति कई राष्ट्रों  का मोह भंग होता हुआ दिख रहा है। चीन की तरफ से ध्यान हटने से कई अन्य देशों को नए अवसर मिल सकते हैं।

4 comments

  1. चीन भारत का एक ऐसा पड़ोसी देश जो भारत से business के साथ भारत की जमीन पर भी दाव लगाए रहता है। कभी पाक परस्ती का भी नमूना पेश करता है। तो कभी सीमा पर युद्ध के हालात पैदा करता रहता है। लिहाजा अब भारत की जनता ने भी चीन के साथ व्यापारिक सम्बन्ध को ठेंगा दिखाने का मुहिम ” बायकॉट चाइना” के नाम से शुरू कर दिया है, जो की समय की मांग भी है । जिससे चीन को सबक सिखाया जाय। चीन का घमंड इस बात से स्पष्ट जाहिर होता है कि, चाइना का सामान भारतीयों के लिए एक मज़बूरी है , इस गंदी मानसिकता का जवाब चीन को सिर्फ “बॉयकॉट चाइना” के द्वारा देकर चीन की अर्थवयवस्था पर तगड़ा चोट किया का सकता है।
    नीतू जी ! आपके इस लेख से महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई। आपको बहुत बहुत
    धन्यवाद…….

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