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लड़ाई समानता की: अश्वेत आन्दोलन

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अवलोकन

  • श्वेत पुलिस अधिकारी द्वारा 46 वर्षीय अफ्रीकी अमेरिकी जॉर्ज फ्लॉयड की मौत ने अश्वेत आँदोलन को गति दे दी है।
  • 1965-1985 के बीच नागरिक अधिकारों के लिए अश्वेत आन्दोलन (ब्लैक पावर मूवमेंट) की शुरुआत हुई।
  • 2013 में अश्वेत आन्दोलन (ब्लैक पावर मूवमेंट )#BlackLivesMatter हैशटैग में बदल गया।
  • 2016 के बाद से श्री ट्रम्प के काल के दौरान आँदोलन ने अपनी ताकत खो दी थी, जो फिर उठ खड़ा हुआ है।

विषय – सूची

  1. अश्वेत आन्दोलन (ब्लैक पॉवर मूवमेंट)
  2. इतिहास
  3. नए अपडेट
  4. जानकारी का विश्लेषण
    1. अमेरिकी जनसंख्या की विविधता
    2. जनसंख्या की गरीबी दर
  5. अन्त में

1. अश्वेत आन्दोलन (ब्लैक पॉवर मूवमेंट)

ब्लैक पॉवर मूवमेंट की शुरुआत संयुक्त राज्य अमेरिका में एफ्रो-अमेरिकियों के नागरिक अधिकारों के लिए हुई, जिन्होंने अपने स्वयं के राजनीतिक और सांस्कृतिक संस्थानों को बनाने पर जोर दिया। वे नस्लीय गौरव के लिए आर्थिक सहायता की माँग भी करते रहे हैं।   आँदोलन पर कुछ घटनाओं और लोगों का बहुत प्रभाव रहा है:

  1.  रॉबर्ट एफ विलियम्स और मैल्कम एक्स का नामक विचारकों का योगदान
  2. पैन-अफ्रीकीवाद (जो कहता है कि अफ्रीकी मूल के सभी लोगों के समान हित हैं और उन्हें एकजुट होना चाहिए), अश्वेत राष्ट्रवाद और समाजवाद जैसी चीजों को ताकत मिली।
  3. क्यूबा की क्रांति और अफ्रीका के पतन के दौर में ऐसी ही एक जैसी बातें थीं, जिसने आंदोलन को प्रभावित किया।
  4. आंदोलन को मजबूत करने वाली अन्य घटनाओं में मैल्कम एक्स ‘ मार्टिन लूथर किंग जूनियर की आलोचना भी शामिल है। एस शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन विधि और के संगठन ब्लैक पैंथर पार्टी (BPP) शामिल है।  

2. इतिहास

1930 में, नेशन ऑफ इस्लाम (एनओआई) एक एफ्रो अमेरिकी आंदोलन था जिसकी स्थापना डेट्रायट, मिशिगन, संयुक्त राज्य अमेरिका में वलाका फतेह मुहम्मद ने की थी। इस आंदोलन का उद्देश्य अफ्रीकी अमेरिकियों की स्थिति में सुधार करना था। बाद में, इसने कई क्रांतिकारी समूहों को प्रेरित किया। मैल्कम एक्स इस आंदोलन का एक लोकप्रिय व्यक्ति था। वह नेशन अॉफ इस्लाम (NOI) के प्रवक्ता थे।

एनओआई के आंदोलन से प्रभावित होकर, 1965 में, वाट के लॉस एंजिल्स के विद्रोह की शुरुआत की गई थी। इसका उद्देश्य आवास, रोजगार और स्कूली शिक्षा में एफ्रो-अमेरिकियों के प्रति अन्याय को खत्म करना था। वाट के विद्रोह के इस लक्ष्य ने कुछ छात्रों को प्रभावित किया। ये लोग संयुक्त राज्य अमेरिका में छात्र अहिंसक समन्वय समिति का हिस्सा थे और नागरिक अधिकारों के लिए काम करते थे। वाट के विद्रोह ने नागरिक अधिकारों के बजाय अश्वेतों के लिए आत्मनिर्भरता और सुरक्षा पर अपनी मुख्यधारा को आकर्षित किया। उन्होंने अपने आन्दोलन को उग्रवाद से जोड़ दिया और छात्रों के लिए डेमोक्रेटिक सोसाइटी जैसे कट्टरपंथी समूहों के साथ विलय कर लिया। यह अश्वेत पॉवर मूवमेंट की शुरुआत थी। 

दो छात्र आयोजकों, स्टोकली  कारमाइकल और विली रिक्स, जो  अहिंसक समन्वय समिति के सदस्य थे, उन्होनें ही सबसे पहले अपने भाषण में “ब्लैक पावर” शब्द का इस्तेमाल किया। यह भाषण 16 जून 1966 को पूरे देश के सामने आया। 

परिणामस्वरूप, अक्टूबर 1966 के अंत में, ह्यु पी न्यूटन और बॉबी सीले ने ब्लैक पैंथर पार्टी (BPP) की स्थापना की। बीपीपी के सदस्यों ने अपनी उन्नति के लिए अश्वेत आबादी को एकजुट करने के लिए दुनिया भर में यात्रा शुरू की। 1970 के दशक में, अश्वेत पैंथर पार्टी के प्रधानमंत्री, स्टोकली कारमाइकल, ने कई देशों का दौरा किया। उन्होंने “ब्लैक पावर” शब्द पर खुलकर बात की और इसे कई जगहों पर क्राँतिकारी भाषा की कुँजी बना दिया। परिणामस्वरूप, ब्लैक पॉवर रिवोल्यूशन के रूप में कई जगहों पर हिंसक विरोध शुरू हो गया। 

ब्लैक पैंथर्स ने हिंसक क्रांति को जारी रखने के लिए ब्लैक लिबरेशन आर्मी का गठन किया। यह इस सक्रिय टीम की एक सक्रिय अवधि थी। 1980 के दशक में अभियान फीका पड़ गया। ब्लैक लिबरेशन आर्मी के कई सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया और ब्लैक पैंथर आर्मी के संस्थापक ह्यु पी न्यूटन को 24 वर्षीय टाइरोन रॉबिन्सन ने गोली मार दी। लेकिन यह अंत नहीं था। 

बीपीपी का एक नया रूप उभर आया। न्यू ब्लैक पैंथर पार्टी का गठन किया गया था। लंबे समय तक समय बिताने के बाद, 2008 में अफ्रीकी अमेरिकियों के बीच फिर से एक आशा की किरण जगी। बराक ओबामा डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्य और पहले एफ्रो-अमेरिकी नेता थे, जो राष्ट्रपति पद के लिए लड़े। ओबामा राष्ट्रपति बने, लेकिन नस्लीय भेदभाव अपनी जगह बना रहा। 

व्यवस्था अफ्रीकी-अमेरिकियों के खिलाफ पक्षपाती बनी रही और दंगे जारी रहे। इसका उदाहरण ट्रेवॉन मार्टिन के मामले में देखा जा सकता है। 26 फरवरी 2012 को, जॉर्ज जिमरमैन नाम के एक व्यक्ति ने एक निहत्थे एफ्रो-अमेरिकी किशोर ट्रेवॉन मार्टिन को गोली मार दी । मार्टिन स्टैनफोर्ड, फ्लोरिडा में महज 17 साल का हाई स्कूल का छात्र था। ज़िमरमैन पर इस हत्या का आरोप लगाया गया, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से आरोपी आत्मरक्षा का बयान दे कर छूट गया। 

मानवाधिकार के लिए आंदोलन ने जुलाई 2013 में एक बार फिर जोर पकड़ा, जब तीन अश्वेत आयोजकों, एलिसिया गार्ज़ा, पैट्रिस कुलौर्स और ओपल टॉमेट ने मार्टिन की हत्या पर चर्चा की और कहा कि, “अवर लाइव्स मैटर” (हमारी ज़िन्दगियों की कीमत है), #BlackLivesMatter “।  

परिणामस्वरूप, #BlackLivesMatter ने डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर अपने पँख फैलाए, जो ब्लैक पॉवर आंदोलन का एक नया आयाम था। वे अब नागरिक अधिकारों के बजाय मानव अधिकारों के लिए दावा कर रहे थे। 

बाद में, 17 जुलाई 2014 को, एरिक गार्नर नामक एक अश्वेत का एक पुलिस अधिकारी ने गला दबा कर उसकी हत्या कर दी। अधिकारी को लगा था कि वह बिना टैक्स दिये गैरकानूनी रूप से सिगरेट बेच रहा था। इससे पहले, उसी वर्ष 9 अगस्त को, 18 वर्षीय अफ्रीकी अमेरिकी लड़के माइकल ब्राउन की पुलिस ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। यह हत्या मिसौरी के एक 28 वर्षीय श्वेत पुलिस अधिकारी डैरेन विल्सन ने की थी। इसकी वजह से पहली बार अश्वेत लोग सड़कों पर उतर आए थे। इन सभी कहानियों ने #BlackLivesMatter को बढ़ावा दिया और यह 2013 से सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले हैशटैग में से एक बन गया।

2016 में, डोनाल्ड जॉन ट्रम्प की राष्ट्राध्यक्षता ने धीरे-धीरे #BlackLivesMatter की लोकप्रियता को कम कर दिया लेकिन, मिनियापोलिस में जॉर्ज फ्लॉयड नाम के अफ्रीकी अमेरिकी की हत्या ने आंदोलन को #BlackPowerMovement के रूप में बदल दिया । अगले भाग में हम जॉर्ज फ्लॉयड मामले पर गौर करेंगे।

3. नए अपडेट

एक एफ्रो-अमेरिकी मूल के युवक, जॉर्ज फ्लॉयड की एक श्वेत पुलिस अधिकारी द्वारा २५ मई 2020 को “मिनियापोलिस” में बर्बरता से हत्या कर दी गई। यह क़त्ल तब हुआ जब पुलिस जॉर्ज को काले धन के इस्तेमाल के आरोप में गिरफ्तार कर रही थी। इस घटना ने #BlackPowerMovement के आंदोलन को हवा दी और न्याय के माँग की लहर को बढ़ा दिया।

नतीजा ये हुआ कि, नागरिक आँदोलन की धारा व्हाइट हाउस के दरवाज़े तक पहुँच गई। देखते ही देखते विरोध इतना बढ़ गया कि न्यूयॉर्क, लॉस एंजिल्स, ऑस्टिन और सिएटल जैसे शहरों की सड़कों पर भारी भीड़ इकठ्ठा हो गई। नौ रातों तक पूरे देश में हिंसक विरोध जारी रहा।

आँदोलन के दौरान कई मूर्तियों और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुँचाया गया। अमेरिका की राजधानी, वाशिंगटन डीसी में स्थित महात्मा गाँधी की प्रतिमा पर कार्यकर्ताओं ने पेंटिंग स्प्रे का उपयोग करके प्रतिमा को कुरुप कर दिया। जून 2020 को क्रिस्टोफ़र कोलंबस की एक मूर्ति को भी उठाकर ले जाया गया और अभियान के दौरान जला दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने नस्लभेदी आंदोलन का विरोध किया और एक ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय से ब्रिटिश साम्राज्यवादी सेसिल रोड्स की मूर्ति को हटाने की मांग की। साथ ही ऐसी कई अन्य मूर्तियों को भी नष्ट क्र दिया गया। आज की तारीख में यह आंदोलन इतना प्रबल होकर देश से बहार अन्य देशो, जैसे – फ्रांस, जर्मनी, इटली, ब्रिटेन, इंग्लैंड तक पहुँच चुका है। आज यह एक वैश्विक आंदोलन के रूप में बदल गया है। इन देशों में क्रूर अमेरिकी पुलिस और नस्लवाद के खिलाफ हजारों लोगों ने रैली की हैं।  

अगले भाग में हम क्रांतिकारियों के दावों की प्रामाणिकता की जाँच करने का प्रयास करेंगे। हम उनकी सामाजिक स्थिति को समझने के लिए अमरीका की अश्वेत आबादी की जनसांख्यिकी की जाँच भी करेंगे।

4. जानकारी का विश्लेषण

इस भाग में संयुक्त राज्य अमेरिका के अफ्रीकी अमेरिकी समुदाय के बारे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को प्रकट करने के लिए जनसंख्या के डेटा का विश्लेषण किया गया है।

4.1 अमेरिकी जनसंख्या की विविधता

2018 की जनगणना के अनुसार, संयुक्त राज्य की कुल जनसंख्या 327,167,439 आंकी गयी। देश का दूसरा सबसे बड़ा तबका एफ्रो-अमेरिकन है। संयुक्त राज्य अमेरिका में इनकी कुल आबादी करीब लगभग 14% पाई गई

हैं। इसके अलावा बता दें कि – ये अश्वेत जनसंख्या देश में समान रूप से वितरित नहीं है। निम्नलिखित मानचित्र अमेरिका में अश्वेत जनसंख्या वाले इलाकों को दर्शाता है।

जनसंख्या – संयुक्त राज्य अमेरिका

कोलंबिया और टेक्सास जैसे जिले में अश्वेत लोगों का प्रतिशत अधिक है। देखा गया है कि – किसी सीमित क्षेत्र में यदि एक जैसे विचार के लोग अधिक हों तो ऐसे क्षेत्र में इस प्रकार के आंदोलनों की संभावना बढ़ जाती है। 

4.2 जनसंख्या की गरीबी दर

किसी स्थान की गरीबी दर से वहां लोगों के बुरे हालातों का पता चलता है। इसे ध्यान में रखते हुए, इस खंड में संयुक्त राज्य अमेरिका की विभिन्न जातीयों के लिए गरीबी दर प्रस्तुत की गई है।

गरीबी की दर के लिए दिए गए ग्राफ से पता चलता है कि- सबसे अधिक गरीबी दर वाले समुदाय अमेरिकन इंडियन / अलास्का नेटिव और ब्लैक आबादी हैं।

इनके अलावा द डेटा ट्रिब्यून के शोध से विभिन्न राज्यों में अश्वेत जनसंख्या और GSP के बीच थोड़ा सकारात्मक संबंध भी पाया गया है। इसे नीचे दिए गए ग्राफ में साफ़ तौर पर देखा जा सकता है:

दिलचस्प बात यह है कि – अमेरिका में रह रहे अश्वेत और बेघर लोगों के आंकड़ों के बीच भी एक सकारात्मक संबंध देखा जा सकता है।

इस ग्राफ को पिछले ग्राफ़ के परिणामों से जोड़कर देखने पर हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि – जहाँ एक तरफ, अश्वेत आबादी राज्य के GSP में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, वहीँ उनके तबके का एक बड़ा प्रतिशत बेघर है।

5. अंत में

इस लेख में हमने ब्लैक पॉवर मूवमेंट की पूरी कहानी सुनी है। हमने यह भी देखा कि अश्वेत आबादी का एक बड़ा हिस्सा घर से वंचित है और गरीबी में रहता है। यह देखा गया है कि अफ्रीकी अमेरिकी वे लोग हैं जो पक्षपाती और क्रूर कानून और व्यवस्था से उत्पीड़ित हैं। उनके सब्र का बांध टूट गया है और उनके दर्द का वर्णन करने वाला एक शब्द है, “काला जीवन मायने रखता है”। हमें सिखाया गया है कि हर जीवन समान रूप से मायने रखता है। सबसे मानवीय दृष्टिकोण यह है कि हर कोई एक ही मानवाधिकारों के साथ पैदा होता है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए। 

5 comments

  1. बहुत बढ़िया नीतू 👏 आपका लेख बहुत बढ़िया है,ऐसे ही लिखते रहिए 👍

    Liked by 2 people

    1. लेख पढ़ने के लिए धन्यवाद। निश्चित रूप से हम लिखना जारी रखेंगे

      Like

  2. नीतू जी ! आपने समानता व अधिकार के आंदोलन की उकृष्ट झांकी अपने इस लेख के माध्यम से स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया है ।
    जो समाज में एक अच्छा संदेश देता है । आप लेखन जारी रखना , आपको बहुत बहुत बधाई।
    धन्यवाद

    Liked by 1 person

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