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पशु क्रूरता: मानवता की हत्या

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अवलोकन

  • पशु क्रूरता के कथित मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
  • हाल ही की एक घटना में, एक गर्भवती मादा हाथी को विस्फोटक खिलाने से उसकी दर्दनाक मौत हो गई।
  • दिल्ली में आवारा कुत्तों के लिए काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं की एक टीम पर हमला किया गया।

विषय – सूची

  1. परिचय
    1.  पशु क्रूरता के रूप
  2. पशुओं के प्रति इतनी क्रूरता क्यों?
  3. पशु क्रूरता से संबंधित अपराध
  4. भारत में पशु क्रूरता के ख़िलाफ़ कानून
  5. क्या करें अगर पशुओं का दमन होता दिखे?
  6. आंकड़ों में
  7. हमारी जिम्मेदारियाँ
  8. अंत में

1. परिचय

भारत एक ऐसा देश है जहाँ बहुत सारी धार्मिक परंपराएँ प्रचलित हैं। इनमें पशुओं के साथ दया करना भी शामिल है, भारत में कुछ धर्म न केवल उन्हें प्राणी मानते हैं बल्कि जानवरों की पूजा भी करते हैं। लेकिन हाल ही में बहुत सी वीडियो सामने आईं हैं, जो या तो जानवरों के प्रति क्रूरता दर्शा रही हैं, या जो उन जानवरों की मदद कर रहे हैं उनके प्रति उपेक्षा।

कई रेलवे ट्रेक्स पर कुत्तों को बंधे और मरे हुए और सड़कों पर मृत तेंदुए के शवों को फेंका हुआ भी पाया गया है। इन तेंदुओं के सिर और पंजे अक्सर कटे हुए रहते हैं। कुत्तों को अवैध तरीके से बाजारों में बेचा जाता है, गायों और गीदड़ों किन्ना खाने योग्य अंग भी पकाकर परोसे जा रहे हैं। कुत्तों, बकरियों और गायों के साथ बलात्कार जैसा जघन्य अपराध भी किया जा रहा है। जानवरों को टिक्-टाक के अनुयायियों ने भी बहुत हद तक हिंसा का शिकार बनाया जो अति निंदनीय कृत्य है। हालाँकि, जिन मामलों को हम देख रहे हैं, वे तो सिर्फ एक झलक हैं। अधिकांश मामले तो प्रमाणित तौर पर भी सामने नहीं आते। मानव अपराध के मामलों में सरकार ध्यान देती है लेकिन, जानवरों पर किए गए अपराध पर सरकार डेटा एकत्र नहीं करती है। इसलिए इनके सही आंकड़ों का पता नहीं चलता। क्रूरता निवारण अधिनियम (पीसीए) के तहत 24000 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इसके अलावा किसी भी अपराध को रोकने के लिए, कानून के सख्त से सख्त नियम लागू किया जाना चाहिए, ताकि भारत में इन्हें बन्द किया जा सके।

1. पशु-क्रूरता के रूप

आइए मनुष्यों के जानवरों के प्रति क्रूरता दिखाने के संभावित तरीकों पर चर्चा करें। 

S.Noक्रूरता का रूपपरिभाषा
1पशुओं के प्रति क्रूरताकिसी जानवर के प्रति दुर्व्यवहार। जानबूझकर एक जानवर को ऐसी स्थिति में डालना जो उन्हें नुकसान पहुंचाए या उन्हें आतंकित करे।
2जानवरों के साथ दुर्व्यवहारकिसी जानवर को जानबूझ कर चोट पहुँचाना।
3पशु की उपेक्षामूल रूप से, जानवर से अनभिज्ञ होना और इस प्रकार, अपनी संपत्ति में लेने के बाद जानवर की देखभाल नहीं करना और ये ध्यान न देना कि- ये भूखा, प्यासा या आहत तो नहीं है।
4पशु शोषणजानवरों के प्रति संवेदनहीनता के चलते उनसे दुर्व्यवहार करना, चाहे वो जानवर की प्रवृत्ति के खिलाफ ही क्यों न हो।  इसमें जानवरों को निर्मम रूप से बंदी बनाना शामिल है।
5मानव की क्रूरतामांस, रोमांच और आर्थिक लाभ के लिए एक जानवर को मारना जो उचित नहीं है। कई मामलों में, जानवरों को उनकी मौत को धीमा और दर्दनाक बनाने के लिए गैर-घातक हथियारों से भी मार दिया जाता है।
6जानवरों में दवा आदि का परीक्षणचिकित्सा या प्रयोगशालाओं में प्रयोग करने के लिए पशु का उपयोग।

2. पशुओं के प्रति इतनी क्रूरता क्यों?

ऐसे कई कारण हैं जो लोगों को पशुओं के प्रति क्रूर बना देते हैं जैसे “स्वार्थ”। क‌ई विकृत मानसिकता वाले लोग भी जानवरों को बहुत पीड़ित करते हैं। कई लोग तो इसे गलत ना मानकर ऐसे लोगों को प्रोत्साहित करने का काम करते हैं।

कुछ चिंतनीय तथ्य ये भी हैं –

  • जानवरों को जीवित प्राणी नहीं माना जाता है: कई लोग जानवरों को एक उपकरण मात्र ही मानते हैं और सोचते हैं कि उनमें भावनाएं नहीं होती हैं। ये लोग जानवरों को निष्क्रिय मानते हैं, और उन्हें नहीं लगता है कि जानवरों को भी चोट पहुँचाते समय वे दर्द महसूस करते हैं।
  • मौद्रिक लाभ के लिए जानवरों का उपयोग करना:     यदि क्रूरता से मौद्रिक लाभ हो सकता है, तो व्यक्ति इसे अपने परिवार या स्वयं के लिए इसके उपयोग को, सही ठहराता है। वे जानवर की भावनाओं को दरकिनार करते हुए केवल अपने आर्थिक लाभ को महत्व देते हैं। इसमें किसान, फर और चमड़ा उद्योग, सर्कस और ऐसे मनोरंजन उद्योग मैं जानवरों का इस्तेमाल और उनके अंगों को बेचना आदि शामिल हो सकता हैं।
  • हक जताने की भावना: कई बार तो लोग जानवरों को इंसानों का बंधक ही मान लेते हैं। इसलिए उन्हें लगता है कि वे अपने जानवरों के साथ अपनी इच्छा के अनुसार कुछ भी कर सकते हैं। लोग ख़ुद को शीर्ष शिकारी साबित करने के लिए जानवरों का शिकार सबसे उचित समझते हैं।
  • जानबूझकर क्रूरता : लोग जानबूझकर भी जानवरों को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं और उनके साथ अपराध करने का उन्हें पूरा अधिकार है ये सोचते हैं।

ये कुछ कारण है जिनसे जानवरों के प्रति हो रही क्रूरता और अपराध का अध्ययन और भी महत्वपूर्ण हो गया है। ताकि वे बिना किसी बंधन के रह सकें। 

3. पशु क्रूरता से संबंधित अपराध

पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) के अनुसार “जानवरों के प्रति हो रही क्रूरता को देख कर भी अनदेखा कर देना ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा देना माना गया है।” कहा जा सकता है कि ऐसे लोग मनुष्यों पर भी की गई हिंसा को रोक नहीं पाएंगे। मनोविज्ञान और अपराधशास्त्र में किए गए शोध के अनुसार, जो लोग जानवरों के प्रति क्रूरता करते हैं, वे इतने में ही नहीं रुकते हैं। बल्कि वे मनुष्यों को भी चोट पहुंचाने में पीछे नहीं रहते हैं। क्योंकि वे ऐसे अपराधों के लिए हमेशा अग्रसर रहते हैं। यूएस फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन के अध्ययन से भी यह सिद्ध होता है कि पशुओं के प्रति दुर्व्यवहार बलात्कारियों और हत्यारों के रिकॉर्ड में नियमित रूप से दिखाई देते हैं।

जानवरों के प्रति हिंसा के कार्य गहरी मानसिक अशांति का संकेत देते हैं और अक्सर, पशु दुर्व्यवहार करने वाले लोग मनुष्यों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए इन मुद्दों के बारे में आवाज उठाने की आवश्यकता है, चाहे वो मानव का मुद्दा हो या पशुओं का। उदाहरण के लिए, घरेलू हिंसा की शिकार 60% महिलाओं ने कहा है कि उनके अपराधी उनके पालतू जानवरों कभी दमन करते हैं। नोएडा (2006) में बच्चों का सिलसिलेवार हत्यारा मोनिंदर सिंह पंढेल भी इसी प्रकार की मानसिकता का शिकार था। 

एली फिलिप्स द्वारा लिखित ASPCA के एक अध्ययन से पता चलता है कि एक ही परिवार में हुए दो या दो से अधिक अपराध आपस में जुड़े होते हैं।

इनमें से कुछ यहां दिए गए हैं:

बाल शोषण (शारीरिक और यौन शोषण सहित) या उपेक्षा, घरेलू हिंसा (मानसिक उत्पीड़न और बलात्कार सहित) बड़ी दुर्व्यवहार या उपेक्षा (वित्तीय शोषण सहित), और पशु दुर्व्यवहार या उपेक्षा (यौन हमला, पशु लड़ाई और लालची मानसिकता सहित)। लिंक में अन्य प्रकार के अपराध जैसे कि आत्महत्या, हथियार संग्रह अपराध , नशीली दवाओं के अपराध, यौन उत्पीड़न, आगजनी, हमले या अन्य हिंसक अपराधों के साथ जानवरों के दुर्व्यवहार की सह-घटना भी शामिल है ।

4. भारत में पशु क्रूरता के ख़िलाफ़ कानून

पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960

पीसीए एक ऐसा कानून है जो 1960 में भारत की संसद द्वारा लागू कराया गया। यह अधिनियम पशु उत्पीड़न पर रोक लगाने पर केंद्रित है।

कानून के प्रावधान के अनुसार, सरकार द्वारा पशु कल्याण बोर्ड का गठन किया गया है।

निम्नलिखित गतिविधियों को अधिनियम की धारा 11 (1) के अनुसार पशु क्रूरता माना जाता है:

  1. पिटाई, लात मारना, ओवर-राइडिंग, ओवर-ड्राइविंग, ओवर-लोडिंग, टॉर्चर करना, किसी भी जानवर को अनावश्यक दर्द या पीड़ा देना।
  2. किसी भी जानवर को नियोजित करना, जो कि उसकी उम्र या किसी बीमारी के कारण, नियोजित होने के लिए मजबूत नहीं है, और फिर भी यह काम किसी भी उद्देश्य से किया जा रहा है।
  3.  विलक्षण और अनुचित रूप से किसी भी जहरीली दवा या हानिकारक पदार्थ को प्रशासन की अनुमति के बिना देना।
  4. किसी भी वाहन में जानवरों को लगाकर, किसी भी तरह का दर्द या पीड़ा पहुंचाना।
  5.  किसी भी पिंजरे या किसी भी तरह के बन्धन में, किसी भी जानवर को रखना या सीमित करना, जो आंदोलन के लिए भी पशु को उचित अवसर प्रदान करने के लिए ऊंचाई, लंबाई और चौड़ाई में पर्याप्त रूप से जगह की माप नहीं करता है।
  6. एक निश्चित समय के लिए किसी भी जानवर को जंजीरों में जकड़ कर या अनुचित तरीके से उन्हें बांध कर रखा जाता है।
  7. मालिक होने के नाते, व्यायाम करने के लिए, या अनुचित रूप से किसी भी कुत्ते को आदतन जंजीरों में जकड़ा या रखा जाता है।
  8. किसी भी जानवर के मालिक का उन्हें पर्याप्त भोजन, पेय या आश्रय देने में विफल होना।
  9. मालिक होने के नाते, बिना उचित कारण के, बुरी परिस्थितियों में किसी भी जानवर को छोड़ दें, जो इस संभावना को प्रस्तुत करता है कि यह भुखमरी या प्यास के कारण दर्द का सामना करेगा।
  10. कोई भी मालिक किसी भी जानवर को  बड़े पैमाने पर गलियों में जाने के लिए अगर तब छोड़ता है, जबकि जानवर एक संक्रामक बीमारी से प्रभावित है, या रोगग्रस्त या विकलांग जानवर है को छोड़ देता है, जबकि वह जानवर मरने वाला है। 
  11. बिक्री के लिए या बिना उचित कारण के, उसके कब्जे में कोई भी जानवर है जो उत्परिवर्तन, भुखमरी, प्यास, भीड़भाड़ या अन्य बीमारी से बिना उपचार के दर्द से पीड़ित है।
  12. किसी भी जानवर का अंग भंग करता है या किसी भी जानवर को मारता है (आवारा कुत्तों सहित), हृदय में या किसी अन्य अनावश्यक रूप से स्ट्राचिन इंजेक्शन की विधि का उपयोग करके।
  13. मनोरंजन प्रदान करने के दृष्टिकोण के साथ भी किसी भी जानवर (एक बाघ के लिए अन्य जानवर को चारा के रूप में बांधने सहित) को सीमित करने का कारण बनता है या किसी अन्य जानवर के लिए शिकार की वस्तु बनाने के लिए, किसी भी जानवर को लड़ने या किसी अन्य जानवर को चारा देने के लिए उत्तेजित करता है।
  14. जानवरों की लड़ाई के लिए या परमिट के लिए, किसी भी जगह के प्रबंधन या उपयोग करने/कराने के लिए अनुमति देता है, जिससे आर्थिक लाभ हो। 
  15. किसी भी शूटिंग मैच या प्रतियोगिता में भाग लेता है जिसमें जानवरों को ऐसी शूटिंग के उद्देश्य से या कैद से छोड़ा जाता है।

पशुओं के प्रति क्रूरता एक दंडनीय अपराध है!

यदि कोई भी पीसीए के तहत दोषी पाया जाता है, तो उसे ₹ 50 या अधिक जुर्माना देना पड़ सकता है। यदि यह 3 साल से कम का अपराध है, तो अपराधी के लिए  ₹25 से लेकर ₹100 तक का जुर्माना या 3 महीने तक का कारावास या दोनों का प्रावधान है। यदि अपराधी के पास वाहन है तो दूसरे अपराध के मामले में, उसके वाहन को जब्त किया जा सकता है और उस व्यक्ति को फिर से कोई जानवर रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

पशुओं के प्रति क्रूरता की रोकथाम (पशुधन बाजारों का विनियमन) नियम, 2017

इसके माध्यम से, भारत सरकार ने पीसीए, 1960 के तहत बनाए गए नियमों के माध्यम से देश भर में पशु वध को प्रभावी ढंग से प्रतिबंधित करने की मांग की थी।

ये सभी नियम पशुओं को क्रूरता से बचाने के लिए बनाए गए हैं। लेकिन कत्लखानों के लिए मवेशियों को मौजूदा व्यापार में विनियमित करने के लिए नहीं। यह ऐसा सोचकर किया गया है कि- बाजार में मवेशियों के अच्छे स्वास्थ्य को सुनिश्चित किया जाएगा और किसानों के लाभ के लिए केवल स्वस्थ पशुओं का कृषि उद्देश्यों के लिए व्यापार किया जाएगा।

अधिसूचित नियम मवेशियों की अवैध बिक्री और तस्करी के दायरे को दूर करेंगे जो एक बड़ी चिंता का विषय है इसे दूर किया जाएगा।

विशेष प्रावधान केवल‌ उनपर लागू होते हैं जो जानवरों को खरीद कर, शेयर बाजारों में जानवरों को जब्त कर लिया जाता है और महंगे दामों में बेचा जाता है। 

5. क्या करें अगर पशुओं का दमन होता दिखे?

  • मदद करें और यदि आवश्यक हो तो पशु के लिए पशु चिकित्सक की सहायता लें। 
  • इसके खिलाफ बोलें, लोगों से बात करके उन्हें यह एहसास दिलाने की कोशिश करें कि उन्हें जानवरों के साथ दुर्व्यवहार नहीं करना चाहिए। ज्यादा से ज्यादा लोगों को स्थिति से अवगत कराएं।
  • कानून को जानें और लोगों को कानून के प्रति जागरूक करें। इसके अलावा, यदि आपको लगता है कि कानून में कुछ बदलाव आवश्यक हैं, तो उसके बारे में भी बोलना शुरू करें।
  • अपराध होने पर पुलिस को तुरंत रिपोर्ट करें। और एफआईआर दर्ज कराएं।
  • अन्य संबंधित अधिकारियों को सूचित करें। उदाहरण के लिए, यदि मामला वन्यजीव से संबंधित है तो पर्यावरण और वन मंत्रालय को सूचित किया जाना चाहिए।
  • अपराधियों को इससे दूर होने से रोकने के लिए दायर मामले को जारी रखें और उसका पालन करें। 

अब, उन जानवरों की संख्या का पता लगाना महत्वपूर्ण है जो क्रूरता से पीड़ित हैं। हालांकि, पशु-क्रूरता मामलों को गंभीरता से नहीं लिया जाता है, इसलिए सटीक डेटा का पता नहीं लगा पाना थोड़ा मुश्किल है। लेकिन इस प्रकार का थोड़ा भी डेटा एक सही अनुमान लगाने में बेहद अच्छा साबित हो सकता है, जिन्हें रिपोर्ट करने के लिए माना जाता है।

6. आंकड़ों में

  • पशु हत्या

हम सभी इस तथ्य से अवगत हैं कि हमारे भोजन के लिए प्रतिदिन कितनी मात्रा में पशुओं की हत्या की जाती है। लेकिन, यह पता लगाना ज़रूरी है कि हम विश्व स्तर पर उनके जीवन को कैसे प्रभावित कर रहे हैं। यहां, नीचे दिया गया ग्राफ दुनिया भर में भोजन में मांस की आपूर्ति की वार्षिक मात्रा को दर्शाता है। 

meet supply quality in food across the world

ग्राफ में वर्षों से बढ़ती मांस की मांग को दिखाया गया है। यह निष्कर्ष निकाला है कि हमारी भोजन की मांग को पूरा करने के लिए जानवरों की एक बड़ी संख्या को मार दिया जाता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इनमें से कई जानवरों को लुप्तप्राय प्रजातियों के तहत रखा गया है।

  • पशु हत्या के लिए विभिन्न क्षेत्रों की तुलना 

यहां, एशिया के दो देशों सहित विभिन्न महाद्वीपों के लिए भोजन में मांस की आपूर्ति की मात्रा की तुलना की जाती है। 

meat supply quality in food

तुलना चीन के बारे में एक दिलचस्प आंकड़ा दिखाती है। चीन अन्य सभी महाद्वीपों के लिए अकेले प्रतिस्पर्धा कर रहा है। और वे अपने भोजन में भारी मात्रा में मांस की आपूर्ति करते हैं। इसके अलावा, चीनी खाद्य बाजार सभी प्रकार के जीवों की खपत की अनुमति देते हैं। इस कारण से अधिकांश जानवर मानव वायरल संक्रमण के कारण चीन में उत्पन्न होते हैं।

  • विभिन्न पशुओं की हत्या का ग्राफ 

आइए उन जानवरों का पता लगाएं जो 1980-2013 के दौरान सबसे ज्यादा मारे गए हैं।

different food item supply in world

डेटा का परिणाम स्पष्ट रूप से सामने है। इन वर्षों के दौरान, मछली और समुद्री खाद्य के बाद सूअर के माँस की दुनिया भर में सबसे अधिक आपूर्ति हुई।

  • रिपोर्ट किए गए पशु-क्रूरता मामले

ऊपर दी गई जानकारी के हिसाब से पशु-क्रूरता के खिलाफ सभी मामले रिपोर्ट नहीं किए जाते हैं। इसलिए, कुल घटनाओं पर ध्यान भी नहीं दिया जाता। कुछ रिपोर्ट किए गया मामलों का ग्राफ नीचे दिखाया गया है।

reported cruelty cases against animals in mumbai

यह ग्राफ मुंबई में छह साल के दौरान पशु क्रूरता के खिलाफ दर्ज रिपोर्ट की संख्या को दर्शाता है। यह भी दावा किया गया था कि लोगों में से कोई भी गिरफ्तार नहीं किया गया था। यह दर्शाता है कि हमारे लिए पशु क्रूरता का मुद्दा गंभीर नहीं है। 

  • सड़क दुर्घटनाओं में घायल हुए जानवर

न केवल पशु वध, पशु क्रूरता जानवरों के लिए घृणित रूप है। यहां सड़क दुर्घटनाओं में घायल जानवरों का डेटा भी लिया गया है। सभी तो नहीं, लेकिन अधिकांश दुर्घटनाएं लापरवाह और तेज ड्राइविंग का परिणाम हैं। यह आंकड़े नागपुर नगर निगम (एनएमसी) द्वारा उपलब्ध कराए गए हैं। 

ऊपर दिया गया ग्राफ केवल मुंबई की दुर्घटनाओं का खुलासा कर रहा है। वहीं ना जाने कितने मामलों की तो रिपोर्ट नहीं की गई है। लेकिन लापरवाही और तेज ड्राइविंग के कारण जानवरों की दुर्घटनाओं के बारे में वैश्विक आंकड़ा आसानी से समझा जा सकता है जो रिपोर्ट नहीं किए गए हैं।

number of injured animals in road accident

आंकड़ों का दावा है कि मुंबई में 2011-12 से जुलाई 2019 तक सड़क दुर्घटनाओं में 11,915 जानवर घायल हुए थे। इनमें सबसे अधिक कुत्ते (9971) हैं।

  • विलुप्त होती हुई प्रजातियाँ

अब, यह समझना महत्वपूर्ण है कि क्रूरता पशु-प्रजातियों को कैसे प्रभावित कर रही है। यहाँ IUCN रेड लिस्ट द्वारा प्रदान की गई खतरे वाली प्रजातियों की रिपोर्ट है।

thereatened speacies in IUCN red list

रिपोर्ट में बहुत गंभीर जानकारी का ख़ुलासा किया गया है, जिसके लिए हाई अलर्ट की जरूरत है। रिपोर्ट के अनुसार समय के साथ बड़ी संख्या में प्रजातियाँ विलुप्त होती जा रही हैं। यह पारिस्थिति तंत्र को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहा है। यह असंतुलन हमारे और हमारे ग्रह के लिए अत्यंत ख़तरनाक है।

7. हमारी जिम्मेदारियाँ

हमारे अध्ययन के अनुसार पशुओं के प्रति क्रूरता बढ़ती जा रही है। वे ऐसे जानवर हैं जो न तो बोल सकते हैं और न ही वे अपने दर्द को साझा कर सकते हैं और न ही विरोध कर सकते हैं। इसके अलावा, उनकी अधिकांश प्रजातियाँ विलुप्ति की कगार पर हैं। इसलिए, मनुष्य के रूप में हमें इन निर्दोष जानवरों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझना अत्यंत आवश्यक हो गया है।

  • हमें सख्त कानून और उपयुक्त दंड की और ऐसे कानून के उचित प्रवर्तन की आवश्यकता है । पीसीए में भी संशोधन की जरूरत है जो कुछ वर्षों में पेश किए गए बिल हैं, एक मसौदा अधिनियम, 2011 और एक निजी विधेयक, 2016 था जिसमें पशु कल्याण संगठनों को मजबूत करने और पशु दुरुपयोग की परिभाषा को बदलने की मांग की गई थी। इसमे जानवरों के साथ क्रूरता की कुछ और श्रेणियों को जोड़ा गया है, अधिनियम को अधिक व्यापक बनाया गया है और बहुत अधिक और उपयुक्त दंड लागू किया गया है। दोनों बिल संसद में पारित नहीं हुए और हमारे पास अभी भी आधी सदी से ज्यादा पुराना कानून है। हमें गायों की सुरक्षा और उनके वध को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश के गौहत्या निवारण (संशोधन) अध्यादेश, 2020 जैसे कानूनों की सख्त जरूरत है। जिसमें अधिकतम 10 साल का सश्रम कारावास और 5 लाख तक का जुर्माना हो। हमें अन्य जानवरों के लिए भी इसी तरह के कानूनों की आवश्यकता है।
  • हमें पशु कल्याण संगठनों को मजबूत करने की आवश्यकता है, जिससे उन्हें प्रत्येक राज्य में स्वतंत्र रूप से बिना किसी बाधा के काम करने के लिए पर्याप्त आजादी हो। 
  • सबसे महत्वपूर्ण बात, बच्चों को जानवरों का सम्मान करना सिखाएं। यह काफी हद तक वयस्कों पर निर्भर करता है, न कि केवल संस्थानों पर क्योंकि बच्चे अपने बड़ों को देखकर अधिक सीखते हैं। इसलिए जानवरों के प्रति दयालुता के उदाहरणों को प्रचारित करने और उनके और सभी के ध्यान में लाने की आवश्यकता है। जानवरों को पालने वाले परिवार भी इस विचार को अपनाएं।
  • पालतू जानवरों को खरीदने के बजाय उन्हें ऐसे ही अपनाएं जो जानवर को एक प्राणी मानने में मदद करेंगे। और जानवर एक वस्तु नहीं इस सोच की भावना को प्रोत्साहन देंगे। 
  • जब आप खरीदते हैं तो सचेत और नैतिक चुनाव करें क्योंकि एक उपभोक्ता के रूप में आपके पास बाजार को नियंत्रित करने की शक्ति है। यदि केवल क्रूरता मुक्त जानवरों और पिंजरे मुक्त जानवरों और पक्षियों या अंडे जैसे उत्पादों को खरीदा जाता है, तो यह एक मजबूत संदेश के रूप में काम करेगा।

8. अन्त में

इस अध्ययन के बाद, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि जानवर केवल मनुष्यों की वजह से पीड़ित हैं। हम पशु क्रूरता को इस तरह से बढ़ा रहे हैं कि उनकी प्रजातियों की एक बड़ी संख्या विलुप्ति की कगार पर है। परिणामस्वरूप, विलुप्त हो रही प्रजातियों की संख्या ऊपर ग्राफ में दिखाई गई है। मनुष्य एकमात्र ऐसा जीव है जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से वनों की कटाई, औद्योगीकरण या शहरीकरण या प्रदूषण या कई अलग-अलग तरीकों से वन्य जीवन को प्रभावित कर रहा है।

जानवरों का एक विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्हें बचाने के लिए हमें कानून के साथ-साथ अपनी कार्यप्रणाली का भी सख्त रूप से पालन करना होगा। पशु क्रूरता के खिलाफ एक साथ मिलकर एक कदम उठाने का समय आ चुका है क्योंकि, “प्रत्येक व्यक्ति द्वारा जलाई गई मोमबत्ती पूरी दुनिया को रोशन कर सकती है”। असल में यही मानवता होगी।

2 comments

  1. पशु क्रूरता : मानवता की हत्या
    कोमल जी ! आपका आर्टिकल अच्छा लगा। उम्मीद करता हूं के आप अपने और भी लेख हम पाठको के लिए समय समय पर लिखती रहेंगी ।
    इंसानों द्वारा पशु के प्रति अमानवीय कृत्य काफी दुखद है । पशु पक्षी भी हम मानवों के जैसे ही अपने अंदर प्यार और तिरस्कार को महसूस करते है।आज विकास के दौर में इंसान पर्यावरण मानकों को बिल्कुल नजरअंदाज कर दिया है । भूगर्भीय जलस्रोतों का दोहन, कल कारखानों के हानिकारक रासायनिक पदार्थों को नदियों में विसर्जित करना,मृदा में अत्यधिक फर्टिलाइजर का प्रयोग, फैक्टरी के खराब धुएं और गैसों का वायुमंडल में मिलना इत्यादि। जिससे सभी प्राणियों को आए दिन भीषण प्राकृतिक प्रकोप का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन इंसान है कि मानता नहीं । लगातार जंगल और पहाड़ की कटाई जारी है। वन्य पशुओं के शिकार चरम पर पहुंच रहे है। जो इंसान अपनी ओछी संतुष्टि के लिए कर रहा है। जिसका परिणाम स्वयं के लिए विनाशकारी सिद्घ हो रहा है। वर्तमान में अनेकों पशु पक्षियों की प्रजाति का अस्तित्व या तो खत्म हो गया है या विनाश के करीब है। इसके प्रति शीघ्र समस्त बुद्धिजीवी वर्ग का जागरूक होना आवश्यक है।जिससे पशु पक्षियों के संरक्षण को बल मिल सके तथा पर्यावरण भी बच सके।
    धन्यवाद……..

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  2. PETA भी कम नहीं हैं. MERCY KILLING के नाम पर सेंकड़ों जानवरों को मार देते हैं PETA वाले

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